
“उत्तरायणी कौथिक महोत्सव-2026” का समापन समारोह उत्साह और सांस्कृतिक रंगों के बीच संपन्न हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम में शिरकत कर प्रदेश की लोकसंस्कृति और परंपराओं को बढ़ावा देने का संदेश दिया।
रंगारंग समापन के साथ संपन्न हुआ “उत्तरायणी कौथिक महोत्सव-2026”
सेवा संकल्प फाउंडेशन द्वारा 5 फरवरी से शुरू हुए इस महोत्सव का आगाज पहले दिन परेड ग्राउंड से भव्य शोभायात्रा के साथ हुआ था। समापन अवसर पर मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्वलित कर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत की। इसके बाद मंच पर लोक कलाकारों ने उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी प्रस्तुतियां दीं, जिनमें पारंपरिक वेशभूषा, लोकनृत्य और लोकगीतों की झलक देखने को मिली।
आकर्षण का केंद्र रहे विभिन्न जिलों की ओर से लगाए स्टॉल
महोत्सव परिसर में प्रदेश के विभिन्न जिलों की ओर से लगाए गए स्टॉल आकर्षण का केंद्र रहे। प्रत्येक जिले से 7 से 8 स्टॉल लगाए गए थे और कुल मिलाकर करीब 100 स्टॉल का चिन्हीकरण किया गया। मुख्यमंत्री धामी ने स्टॉलों का अवलोकन कर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं और स्थानीय कारीगरों की सराहना की।
“वोकल फॉर लोकल” की थीम को दिया बढ़ावा
महोत्सव में “वोकल फॉर लोकल” की थीम को विशेष रूप से बढ़ावा दिया गया। स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प, पारंपरिक परिधानों और उत्तराखंड के स्वादिष्ट व्यंजनों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। एक ही छत के नीचे प्रदेश की विविध संस्कृति, लोकजीवन और परंपराओं की झलक देखने को मिली।
देवी-देवताओं की झांकियां की प्रस्तुत
कार्यक्रम के दौरान देवी-देवताओं की झांकियां भी प्रस्तुत की गईं, जिसने श्रद्धा और आस्था का माहौल बनाया। बच्चों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जबकि प्रसिद्ध लोकगायकों ने भी अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधा। उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में जानकारी दी गई कि मुख्यमंत्री द्वारा “नंदा शिखर सम्मान” से भी विशिष्ट योगदान देने वालों को सम्मानित किया जाएगा।
विभिन्न संस्थाओं ने बढ़-चढ़कर दिया आयोजन में योगदान
आयोजन में विभिन्न संस्थाओं ने बढ़-चढ़कर योगदान दिया, जिससे महोत्सव को भव्य स्वरूप मिला। समापन समारोह ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और परंपराएं आज भी जीवंत हैं और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए समाज के सभी वर्गों की सहभागिता जरूरी है।
