
हल्द्वानी, गुरमीत सिंह चंडोक।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कुछ दिन पहले घोषणा की थी कि 15 साल पुराने कमर्शियल वाहनों की फिटनेस फीस बढ़ाने का फैसला अभी लागू नहीं होगा। परिवहन विभाग ने इस पर अधिसूचना भी जारी कर दी, सचिव परिवहन बृजेश कुमार संत के हस्ताक्षर के साथ। सरकार की मंशा स्पष्ट थी महंगाई के दौर में वाहन स्वामियों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
केंद्र सरकार ने हाल ही में फिटनेस फीस में 10 गुना तक की बढ़ोतरी की थी। इससे टैक्सी, मैक्सी कैब, ट्रक और बस चलाने वाले लोग सीधे तौर पर प्रभावित होते। यही वजह थी कि मुख्यमंत्री ने जनता की भावनाओं को देखते हुए फैसला लिया कि उत्तराखंड में यह बढ़ी हुई फीस अभी 21 नवंबर 2026 तक स्थगित रहेगी।
लेकिन सरकार की इस राहत का फायदा जमीन पर लोगों को नहीं मिल पा रहा है। अधिसूचना जारी होने के बावजूद कई फिटनेस सेंटरों और क्षेत्रीय परिवहन दफ्तरों तक इसकी आधिकारिक जानकारी पहुँची ही नहीं। नतीजा वाहन स्वामी फिटनेस सेंटरों के चक्कर काट रहे हैं, कुछ जगहों पर उनसे पुरानी बढ़ी हुई फीस भी मांगी जा रही है।
फिटनेस सेंटर चलाने वाले भी उलझन में हैं। वे कहते हैं कि बिना किसी पत्र या आधिकारिक निर्देश के वे सिस्टम में बदलाव नहीं कर सकते। अधिकारी कहते हैं उन्हें ऊपर से कोई सूचना नहीं मिली। और इस पूरे चक्कर में फँस रहे हैं आम वाहन मालिक जो सरकार से राहत की उम्मीद लेकर निकलते हैं और दफ्तरों के बाहर खड़े होकर परेशान होते हैं।
स्पष्ट है कि सरकार ने राहत तो दी, पर राहत की सूचना जहाँ पहुँचनी चाहिए थी, वहाँ पहुँची ही नहीं। अब लोगों की एक ही मांग है फैसले का फायदा कागजों में नहीं, जमीन पर दिखना चाहिए।
